Monday, December 21, 2009

शायद ...इसीलिए परियां अब इस ज़मीन पर नहीं आती

कल का दिन मुझे व्यथित  कर गया | एक मित्र महोदया ने एक अजन्मी बच्ची की हत्या कर दी क्यूंकि उनको अपनी पहली संतान के रूप में एक बिटिया नहीं चाहिए थी कैसी त्रासदी है जब पढ़े लिखे जागरूक लोग ऐसी मानसिकता रखते हैं तो बाकि लोगो से कोई क्या उम्मीद रहे?
यक्ष प्रश्न ......क्या शिक्षा ने यही जागरूकता दी हमे ???????


एक माँ ही जब जन्म देती बेटी को तो फिर क्यूँ ऐसे रोती
जानती नहीं लाडली बेटियां ही तो माँ की परछाई होती !
कच्ची दीवारों के खोखले रिश्तो से अनजान हंसती गाती
रुनझुन रुनझुन क़दम बढ़ाती छन छन से पायल छनकाती !
कभी दस्तूरों तो कभी रिवाज़ के हाथों पल पल सताई जाती
निष्कासित इंसानियत के इस क्रंदन पर आँखे भर आती !
खली दामन खोखले रिश्ते बचाने को अग्नि परीक्षा दी जाती
जीवन जीने की तमन्ना हर बार बेबसी से यूँ कुचली जाती !
कभी जीते जी तो कभी पैदा होने से पहले ही मार दी जाती
आखिर क्यूँ बाबुल के घर में बेटियां इतनी पराई हो जाती !
सुबह की ओस चाँद की मेहँदी लगाये आस की लौ जगती 
दिए की चाह में चांदनी से जल बैठी सुलगती सी रहती !
पर कटी हैं, पैर कटी हैं  फिर भी ऐसे ही जीने को हैं मजबूर
इक बार नहीं सौ बार नहीं मर मर के हर पल में ये जीती !
कभी पी जाएँ गम का विष , तो कभी पंखे से उतारी जाती
लाल जोड़े के बहाने बेसबब , लाल कफ़न में दफनाई जाती !
बाबुल के घर की लक्ष्मी, अम्मा की लाडो बाबा की दुलारी
यूँ अचानक बिना बीमारी, अल्लाह को प्यारी हो जाती !
इस दश्त में मासूमियत जिल्लत सहती, इंसानियत मरती
भरोसे बिक जाते सरे राह जिंदगी बेज़ार सिसकती !
दिल ए रेगिस्तान में फंसी, जिंदगी के मिराज में भटकती
नाउम्मीदी होगी हासिल, मालूम है इनको अपनी हस्ती !
उम्मीदों के बादल की बरखा टीस का पानी बन झड जाती
शायद ...इसीलिए परियां अब इस ज़मीन पर नहीं आती !



सभी मित्रो से एक विनम्र निवेदन ~
अगर कुछ लोगो भी ये गुनाह कर पाने से हम रोक पाए
तो लगेगा की अब भी कुछ इंसानियत जिंदा है कहीं
कृपया इस पोस्ट का लिंक  को अपने सभी मित्रों को भेजे
शायद इस सोते हुए समाज को कुछ जागरूक कर पायें 

27 comments:

  1. प्रश्न वाजिब है!
    बहुत ही मार्मिक लिखा है।
    बधाई!

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  2. uff! beti ka dard, ladki hone ki vyatha..........bakhubi bayan kar di hai..........kya fayada aisi duniya mein aane ka jahan uski kadra na ho...........bahut hi umda lekhan.

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  3. बहुत अच्छी लगी यह पोस्ट....

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  4. padh kar yakin nahi hota hey k aaj k jamaney main bhi aisa hota hey.......

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  5. bahut hi behtarin umda kism ka ye likha aapne...qs vakai sochne wala hai ..kya aaj ham vakai padhe likhe hai..kya aaj samast bharatvarsh se aap ye ummed karte hai ki wo 2020 tak viksit desh ban jayega...in sab harkato se...ye bahut hi soch vichar ka vishay hai..mai dhanwavad dena chahunga mam ka..ki unhone inti marmik lekh likhi...dhanwvad

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  6. सही दर्द उकेरा है आपने
    शिद्दत से उभारा है
    नजारा सबको मालूम है
    फिर भी नजरें छिपाये रहते हैं

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  7. nice written but we should also discuss the problems like dowry and security of females which are root cause associated with this problem .....yes we should make alert every one specially educated where it is more prevalent in our punjab and haryana i will say .............

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  8. समझ नहीं पा रहा हूं कि क्या कहं क्योंकि क अब तो उस मां को भी कोसने का मन नहीं करता जिसने ये किया ......उसने तो जमाने के क्रूर रिवाजों को देख कर ही ऐसे कठोर कदम बढाए होंगे । जो भ हो आज के समाज के मुंह पर ये करारा तमाचा है ....।
    हां आपके पोस्ट पर टिप्पणी करने में दिक्कत रही है

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  9. बहुत सुन्दर तरीके से अपने कन्या भ्रूणहत्या के इस इस विषय पर रौशनी डाली है..

    ऐसा करने वाले खूनी (माता पिता & डाक्टर) को सजाए मौत मुक़र्रर कर देनी चाहिए

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  10. ab sahi kiya aakanksha.........kam se kam sabko pata to chale ki aaj bhi padhe likhon ka ye haal hai to ek anpadh ye sab kare to usse kya gila kare koi...........ek jagruk karne wali post.

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  11. आकांक्षा जी, विषय अत्यन्त मार्मिक है, चिन्तनीय भी किन्तु यह विकृति आधुनिक संभ्रांत भारतीय समाज की है जो कि शिक्षित भी है, सम्पन्न भी। यह विकृति प्रमाण है भारतीय शिक्षा प्रणाली में संस्कृति व नैतिक शिक्षा से वियोग का। हमारी परम्पराएं अथवा हमारी संस्कृति इसके लिए लेशमात्र भी दोषी नहीं हैं।
    आपकी रचना अत्यन्त भावपूर्ण व संवेदनयुक्त है।

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  12. बहुत बढ़िया पोस्ट है।बधाई।

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  13. आप सभी दोस्तों से एक विनम्र निवेदन आप सभी का सादर आभार जो आपको यह रचना पसंद आई लेकिन सिर्फ बढ़िया पोस्ट है लिख कर इसे भूल न जाएँ कृपया अपने दोस्तों को आगे भेजे यह सिर्फ एक छोटी सी कोशिश है मेरी इस सोये हुए समाज के शिक्षित अनपढ़ों को जगाने की आप भी मेरी इस पहल में सहयोग करें | दीप से दीप जलाएं सोते हुए लोगो को जगाएं | शिक्षित अनपढ़ों आखिर कब जागोगे ??????

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  14. Bohat Masroof Rehte Ho
    Sehar Se Shaam Honay Tak
    Koi Lamha Nahin Milta
    Koi Be Naam Si Fursat
    Koi Gumnaam Si Surat
    Kabhi Bethe Huey Tanha
    Kahin Jo Shaam Ho Jaye
    To Meri " ILTEJA " Hai Ye
    Koi Lamha Chura Lena

    Jo Mere Naam Ho Jaye…

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  15. आज की स्थिति को बयां करती पोस्ट।

    समाचारों में दिखलाया जाता है महिलाओं का शोषण।
    तो दूसरी ओर दिखलाया जाता है महिला-मुक्ति आन्दोलन।
    महिला-मुक्ति आन्दोलन का समाज पे इतना प्रभाव है,
    कि जन्म से ही पहले "मुक्ति" का प्रस्ताव है।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman. blogspot. com

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  16. suman ji ne bahut sahi kaha hai.."janm se pahle hi mukti"

    marmik abhivyakti..

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  17. समझ मे नही आता क्या लिखू , समाज को क्या काहु . जो एक बेटी , एक बहन ,एक मा और पत्नी को आज तक समझ नही पाया . प्रियंका जी ये नकारा समाज ना जाने कब अपने आप को पुरुष रूपी तमगे से मुक्त करेगा . शायद अभी नही तो कभी नही , एक मा ही अपनी अजन्मी संतान से मुक्ति पाना चाहतीं है. कैसे विडंबना है .समाज की , ये कटु सत्या है ,इसको झुठलाया नही जा सकता . इस सत्य को स्वीकार करना ही होगा तभी कुछ सार्थक परिणाम निकल सकता है .
    दिलीप कुमार सिंह

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  18. very beautifully written Akanksha ...

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  19. very beautifully written .....

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  20. HAR WAAKYA ME SACCHAI HAI...

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  21. bahut sahi likha hai...
    its a very touching situation...and the most important thing that we all must do is to spread awarness against it...

    A sarcasm against the evil of female foeticide....
    I can't place the complete verse here, so I'm giving the link....
    spread the cause..

    http://ashksymphony.co.cc/2010/05/7-days.html

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  22. दिल पसीज गया , एस गुनाह करने वाले को तुरंत फाशी दे देनी चाहिए . भारत स्वाभिमान एस कानून बनवा के रहेगा .

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  23. DON'T READ SIMPLY .. Requesting to all.. Plz Try to adapt it in your life..

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  24. An English translation of the site would be very helpful, and could reach more people around the globe..
    Tina Kelaiditi, Athens, Greece

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